Saturday, 29 January 2011

तेरी याद ने...

तेरी याद ने मेरे दिल को सजा रखा है....
तेरे प्यार में सब को भुला रखा है..

कुछ अच्छा नहीं लगता तेरी जुदाई के बाद...
एक तेरी याद को सीने से लगा रखा है...

तेरा मिलना तो अब एक ख्वाब ही लगता है...
ना जाने अब क्यूँ दिल को भुला रखा है..

सब कुछ लुट गया हमारा तेरे प्यार में...
तेरी याद को पलकों में छुपा रखा है..

मुक़द्दर से मिलते हैं बिछड़ के वरना...
आज भी तेरा नाम दिल में सजा रखा है...

ना जाने कोई नहीं बसता तेरे सिवा आँख में...
एक तेरी तस्वीर को दिल में छुपा रखा है.....

Saturday, 27 November 2010


प्यास वो दिल की बुझाने कभी आया भी नहीं
कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं
बेरुख़ी इससे बड़ी और भला क्या होगी
एक मुद्दत से हमें उस ने सताया भी नहीं
रोज़ आता है दर-ए-दिल पे वो दस्तक देने
आज तक हमने जिसे पास बुलाया भी नहीं
सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने
वो फ़साना जो कभी हमने सुनाया भी नहीं
तुम तो शायर हो "क़तील" और वो इक आम सा शख़्स उसने चाहा भी तुझे और जताया भी नहीं

..................................................... "क़तील शिफ़ाई" 

Friday, 26 November 2010

मैं तन्हा था..

मैं तन्हा था, मंजिल मंजिल भटक रहा था....
तन्हाई का बोझ उठाये...
दिल में अपना दर्द छुपाये...

मैं तन्हा था..

यूँ ही एक दिन चलते चलते..
हुस्न का जलवा सामने आया...
बेहद रंगीन, बेहद सादा.....
साँसों में उसकी अजब सी खुशबू...
उस में था कुछ ऐसा जादू...
यूँ मेरे एहसास पे छाया..
उसकी नजर से रोशनी लेकर..
मैंने अपना सहर सजाया...
मैंने उसे अपना महबूब बनाया.....
मैंने उसमे क्या कुछ देखा....
मैंने उसमे सब कुछ पाया...
गायब हुयी तन्हाई इस दिल से...
नयी उमंग इसमें छायी....
मिली गयी एक नयी जिन्दगी...
..........................................

Tuesday, 5 October 2010

संग तेरे जीने-मरने कि फ़रियाद.....

संग तेरे जीने-मरने कि फ़रियाद......
     हर पल किया करते है......

रह नहीं सकते तेरी जिंदगी में तो क्या......
    एक छोटी से 'याद' कि फ़रियाद....
     तेरे दिल में, किया करते है.....

इक दिन तू हो जायेगी किसी और कि....
    बंध जायेगी किसी और से....
दिन हो वो आखिरी मेरी जिंदगी का....
    रब ये यही फरियाद हर पल....किया करते है....

जी नहीं सकते तेरे बिना तो क्या.....
    मिटा देंगे अपनी हस्ती को....
बस तू रहे 'खुश' सदा .....यही आरज़ू इस दिल में...
हर पल रखा करते है.....

Thursday, 23 September 2010

Teri Inayat Bas.......

Teri inayat bas itni ho jaye.... 
Meri ruh ko sukun aa jaye.......
Jeewan k andhero se darte nhi hum.....
Dar to is baat ka hai ki.....
Chalte chalte kahi raste hi na kho jaye... 
Mukamal kar mere maula gumo ka ashiyana..
Koi dil se anchua na reh jaye...
Gum chahe jitne de tera haqk hai.. 
Bas teri najre kahi mere aasuo se na hat jaye....


                                                          ........... 'Kanupriya'

Tera Haath Mere Haath me ho to......

Tera haath, haath me ho agar.......,
To safar hi aslehayat hai...............,
Mere har kadam pe hai manjile.....,
Tera pyar gar mere saath hai....... !!
Meri baat ka mere hum nafaz tu jawab de ki n de mujhe......
Teri ek chuppi jo hai chupi wo hazar bato ki baat hai.......


                                                             ......... 'Kanupriya'